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क्या हुआ शिक्षकों के पहचान पत्र (I-card) के पैसे का?

       

          कोरोना काल के दौरान विभाग द्वारा सभी शिक्षकों के लिए पहचान पत्र (I-card) बनाने के लिए धन आवंटित किया गया था। प्रति शिक्षक ₹50 के दर से धन आवंटित किया गया था। उस दौरान अधिकतर काम ऑनलाइन हो रहे थे तो शिक्षकों से ऑनलाइन फोटो और डाटा मांगा गया था और अधिकतर शिक्षकों ने दिया भी था। परंतु मात्र कुछ ही शिक्षकों का पहचान पत्र बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी किया गया। बाकी के शिक्षकों का पहचान पत्र आजतक न तो बन पाया और न ही उसके लिए आवंटित पैसों का कुछ अता पता है।



         इतने वर्ष गुजर जाने के बाद भी अधिकारियों ने एक बार भी सुध नहीं ली। ऐसे में जब कहीं अन्य जगह बेसिक के शिक्षकों को ड्यूटी लगती है तो हर बार उनको खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से टेंपरेरी पहचान पत्र बनवाना पड़ता है। और कई बार अपने शिक्षक होने का प्रमाण देने के लिए ज्वाइनिंग लेटर दिखाना पड़ता है, जिससे शिक्षकों को काफी परेशानी होती है।


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BSA सीतापुर ने उतारा सरकार का कर्ज

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