सभी को पता है कि तमाम सबूत उनके खिलाफ होने के बावजूद आज भी वो उसी जिले में उसी पद पर बने हुए हैं जबकि पीड़ित शिक्षक पर कार्यवाही चल रही है। जिसका मतलब साफ है कि सरकार ने उनको संरक्षण दिया।
ऐसे में उन्होंने सरकार से वफादारी दिखते हुए BJP के रैली में बेसिक में तैनात शिक्षक व अन्य कर्मियों को भीड़ बढ़ाने का लेटर जारी कर दिया। और न जाने पर कार्यवाही की धमकी भी दे डाली।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकारी तंत्र का किसी पार्टी के लिए उपयोग करना क्या संवैधानिक है?