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BSA सीतापुर ने उतारा सरकार का कर्ज

  अपने कृत्यों और बेल्ट कांड को लेकर चर्चा में आए सीतापुर BSA अखिलेश प्रताप सिंह एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।
   सभी को पता है कि तमाम सबूत उनके खिलाफ होने के बावजूद आज भी वो उसी जिले में उसी पद पर बने हुए हैं जबकि पीड़ित शिक्षक पर कार्यवाही चल रही है। जिसका मतलब साफ है कि सरकार ने उनको संरक्षण दिया।
   ऐसे में उन्होंने सरकार से वफादारी दिखते हुए BJP के रैली में बेसिक में तैनात शिक्षक व अन्य कर्मियों को भीड़ बढ़ाने का लेटर जारी कर दिया। और न जाने पर कार्यवाही की धमकी भी दे डाली।

   ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकारी तंत्र का किसी पार्टी के लिए उपयोग करना क्या संवैधानिक है?




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बड़ी खबर, NSCT का पहला सहयोग 6 लाख पार

       TSCT (टीचर्स सेल्फ केयर टीम) की तर्ज पर माह फरवरी 2025 में TSCT पदाधिकारियों ने मिलकर उत्तर प्रदेश के सभी वर्ग के लोगों के लिए NSCT ( नेशनल सेल्फ केयर टीम) को मार्केट में उतरा था। जिसमें टीचर्स के अलावा उत्तर प्रदेश के सभी लोग जैसे सरकारी कर्मचारी, प्राइवेट कर्मी, व्यापारी, छात्र व किसान इत्यादि जुड़ सकते हैं।

      TSCT की सफलता को देखते हुए अन्य लोगों की उसमें जोड़ने की मांग काफी समय से उठ रही थी। जिससे TSCT अध्यक्ष श्री विवेकानंद आर्य जी ने अपनी टीम से सलाह लेकर NSCT की स्थापना की।

      NSCT में जुड़े सदस्यों ने दिवंगत आशुतोष गिरी जी के नॉमिनी के खाते में मात्र ₹50 का सहयोग कर के पहला सहयोग अलर्ट पूरा किया। जिसमें 6 लाख से भी अधिक का सहयोग उनके नॉमिनी को हुआ।

     टीम का कहना है कि सहयोग की संख्या और तेजी से बढ़ेगी और जल्द ही हम TSCT की तरह छोटे से सहयोग मात्र से 50लाख तक का सहयोग दिवंगत साथी के नॉमिनी तक आसानी से पहुंचा सकेंगे। जिससे किसी भी साथी के परिवार को उनके न रहने पर आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जा सकेगी।

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' UPPSC में 86 में से 56 यादव' की पोस्ट निकली फर्जी, लीगल नोटिस जारी

      विगत कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक भ्रामक खबर चल रही थी जो कि Dainik Jagran न्यूज़ द्वारा उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर की गई थी जिसमें उन्होंने पुनः “सपा सरकार  में एक ही जाति के थे 86 में से 56 SDM” की तरह खबर चला कर समाजवादी पार्टी एवं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया था।

      इस प्रकरण को लेकर समाजवादी विचारधारा और PDA समाज के लोगों में एक रोष व्याप्त थी, ऐसे में दैनिक जागरण और उनके संपादकों पर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए समाजवादी लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एडवोकेट अर्पित वर्मा द्वारा E-mail के माध्यम से एक Legal Notice भेज दी गई थी। यह कि यदि उनके द्वारा यह पोस्ट नहीं हटाया गया या इसका खंडन नहीं किया गया तो न्यायलय में मानहानि का मामला दर्ज किया जाएगा। 

    लीगल नोटिस मिलते ही दैनिक जागरण ने अपने बचाव हेतु फर्जी पोस्ट को तुरंत अपने अकाउंट से हटा दिया है।

सूत्र।

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बडी खबर-इंचार्ज पद पर तैनात बेसिक शिक्षकों को एरियर का भुगतान



    आज़ इंचार्ज हेडमास्टर की याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में योजित कंटेम्प्ट केस में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए इंचार्ज पद पर कार्य कर रहे शिक्षकों को एरियर का भुगतान कर दिया गया है। 
याचियों के अधिवक्ता अर्पित वर्मा द्वारा दायर कंटेम्प्ट याचिका संख्या 463 (अनूप द्विवेदी एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार) एवं कंटेम्प्ट याचिका संख्या 468 (सिद्धनाथ पांडेय एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार) में सुनवाई करते हुए न्यायालय द्वारा बीएसए बलरामपुर पर जुर्माना लगाते हुए निर्देश दिया गया था कि रिट याचिका के आदेश का पालन किया जाए। जिसको लेके बीएसए बलरामपुर ने बेसिक शिक्षा विभाग एवं वित्त विभाग को पत्र लिखकर मामले का संज्ञान लेने का अनुरोध किया था। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए बलरामपुर जिले के शिक्षकों को एरियर का भुगतान कर दिया गया है। शिक्षकों का पक्ष रख रहे अधिवक्ता से वार्ता में बताया गया है कि पूरे उत्तर प्रदेश में इंचार्ज अध्यापक के पद पर अपनी सेवा दे रहे शिक्षकों को याची लाभ मिल रहा है, ऐसे में माना जा रहा कि अब अन्य जिलों के शिक्षकों को भी कोर्ट से लाभ मिलने का रास्ता खुल गया हैं।

अधिवक्ता अर्पित वर्मा लखनऊ बेंच 
संपर्क सूत्र-9450909212

बलरामपुर में प्रभारी शिक्षकों को वेतन देने का कोर्ट ने दिया आदेश

 सिद्ध नाथ पाण्डे व अन्य द्वारा डाली गई याचिका 6571/2024 के वकील अर्पित वर्मा की 20 अगस्त को पहली ही सुनवाई में लखनऊ खंडपीठ ने सभी को प्रधानाध्यापक पद का वेतन व एरियर देने का आदेश BSA बलरामपुर को दिया। इस मामले के निस्तारण के लिए BSA बलरामपुर को मात्र 6 सप्ताह का समय कोर्ट द्वारा दिया गया है।


तुगलकी फरमान, शिक्षक परेशान

   परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों की उपस्थिति 15 फरवरी से ऑनलाइन ही मान्य होगी, मगर जिले में अभी तक शिक्षकों ने प्रेरणा एप पर Login ही नहीं की। इससे 15 फरवरी से विद्यार्थियों की उपस्थिति ऑनलाइन करना संभव नहीं लग रहा है।

    जिले में 3446 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें से 2777 विद्यालयों को 5212 टैबलेट उपलब्ध कराएं गए हैं। विभाग की ओर से सभी टैबलेट का 14 रजिस्टरों का डिजिटलाइजेशन किया जाना था। मगर जिले में इसकी प्रक्रिया काफी धीमी चल रही है। अधिकांश टैबलेटों पर अभी तक प्रेरणा एप का डाउन लोड ही नहीं किया गया है।

    वहीं महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने सभी बीएसए को आदेश जारी कर 15 फरवरी से विद्यार्थियों की उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। इससे परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कंपोजिट व कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्रों की रियल टाइम उपस्थिति अपडेट करनी होगी। इसी के साथ मध्याह्न भोजन की भी डिजिटल पंजिका ही मान्य होगी।

   आदेश में कहा गया कि है कि शिक्षक एक अप्रैल से सितंबर 2024 तक स्कूल के दिनों में बच्चों की उपस्थिति सुबह आठ से नौ बजे के बीच और एक अक्तूबर से 31 मार्च 2025 तक सुबह नौ से दस बजे तक टैबलेट/ स्मार्टफोन से दर्ज करेंगे। वहीं एमडीएम के लाभार्थी, मेन्यू, खाद्यान्न आदि का विवरण भी प्रतिदिन भोजन के बाद अनिवार्य रूप से अपडेट करेंगे। इसके लिए एक अप्रैल से 31 सितंबर 2024 तक दोपहर 12 बजे और एक अक्तूबर से 31 मार्च 2025 तक 1.30 बजे का समय तय किया गया है।




    मगर विभागीय आंकड़ों के अनुसार मल्लावां ब्लॉक पर प्रेरणा एप डाउन लोड करने वालों की संख्या शून्य है। वहीं अन्य ब्लॉकों में एक से 10 प्रतिशत है। ऐसे में 15 फरवरी से विद्यार्थियों की रियल टाइम उपस्थिति दर्ज करना बहुत ही मुश्किल होगा। बीएसए विजय प्रताप सिंह ने बताया कि सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर विभागीय निर्देशानुसार डिजिटलाइजेशन का कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं।


    शिक्षकों का कहना है कि जब तक विभाग द्वारा सिम उपलब्ध नही कराया जाता वो इसका संचालन करने में असमर्थ हैं। क्योंकि खुद के ID से सिम लेने से आगे चलकर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि ट्रांसफर होने के बाद टैबलेट सिम सहित अगले को हस्तांतरित करना होगा और किसी भी अनहोनी होने पर उसको समस्या का सामना करना पड़ेगा। उसको यह भी कहना है कि एक निश्चित समय में ही उपस्थिति दे पाना संभव नही क्योंकि अर्ली वार्निंग सिस्टम के तहत बुलावा टोली भेजी जाती है और कभी कभी बच्चों को टोली, अभिभावक और SMC सदस्यों की सहायता से स्कूल तक लाने में 1 घंटे से ऊपर लग जाता है, ऐसे में समय की बाध्यता होने पर वह अनुपस्थित हो जायेगा।


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ऑफलाइन खत्म होने नहीं देंगे और ऑनलाइन भी करवाएंगे। क्या करे बेचारा शिक्षक?

      महानिदेशक, स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा की ओर से इस व्यवस्था को सख्ती के साथ लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश में कुल 1.32 लाख परिषदीय स्कूलों और 749 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में इसे लागू किया जा रहा है। ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज होने के बाद प्रधानाध्यापक उपस्थिति का शत-प्रतिशत सही ब्यौरा ही भेज सकेंगे। वह अधिक छात्र संख्या नहीं दिखा सकेंगे। मिड डे मील प्रतिदिन कितने विद्यार्थी खा रहे हैं, इसकी भी सही जानकारी मिल सकेगी। छात्रों की उपस्थिति का ब्यौरा शैक्षिक सत्र में एक अप्रैल से 30 सितंबर तक सुबह आठ बजे से नौ बजे के बीच अनिवार्य रूप से भेजना होगा। वहीं एक अक्टूबर से 31 मार्च तक सुबह नौ बजे से 10 बजे के बीच अनिवार्य रूप से भेजना होगा। इसी तरह MDM का ऑनलाइन ब्यौरा शैक्षिक सत्र में एक अप्रैल से 30 सितंबर तक दोपहर 12 बजे तक देना होगा। – वहीं एक अक्टूबर से 31 मार्च तक यह ब्यौरा दोपहर 1:30 बजे तक देना होगा।

      स्कूलों में उपस्थिति व MDM सहित 12 तरह के सभी रजिस्टर ऑनलाइन किए जा रहे हैं। वहीं शिक्षकों की उपस्थिति के बारे व में अभी कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं। बीते वर्ष नवंबर में सात जिले जिसमें लखनऊ, उन्नाव, हरदोई, लखीमपुर खीरी, रायबरेली, सीतापुर व श्रावस्ती में छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों की भी आनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था की गई थी लेकिन शिक्षकों ने इसका विरोध किया। बेसिक शिक्षा विभाग बैकफुट पर आ गया। यही कारण है कि अभी छात्रों की उपस्थिति आनलाइन दर्ज – कराने की व्यवस्था की गई है और शिक्षकों को छोड़ दिया गया है।



     बेसिक शिक्षा विभाग का डिजिटल होना शिक्षकों के साथ मात्र एक छलावा साबित होता है। इससे पहले मानव संपदा पर सभी शैक्षिक अभिलेख व प्रमाण पत्र ऑनलाइन कर दिए गए हैं। बावजूद इसके हर बार ट्रांसफर इत्यादि के लिए कम से कम 40 पन्नो का फाइल बना कर शिक्षकों को जमा करना पड़ता है। और ऐसा एक बार नही लगभग हर साल करना पड़ता है। कोई भी चीज ऑनलाइन तो हो जाती है लेकिन अधिकारी उसको ऑफलाइन भी मांगते हैं। विभागीय सूचनाएं आज भी बार बार व्हाट्सएप ग्रुप पर भेजने के साथ साथ BRC पर भी जाकर हार्डकॉपी जमा करना पड़ता है। जिसमें MDM की सूचना और रसोइया उपस्थिति व शिक्षामित्रों की उपस्थिति प्रमुख हैं। शिक्षकों को दोहरा काम करना पड़ता है और परेशानियों का सामना करना पड़ता है।


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अगर देते हैं कार्यक्रम के लिए विद्यालय की चाबी, तो हो जाइए सावधान !


      अलीगढ़। सीडीओ आकांक्षा राना ने शुक्रवार को ब्लॉक जवां के ओडीएफ प्लस घोषित साथा गांव का निरीक्षण किया। यहां के प्राथमिक विद्यालय साथा में तेरहवीं का कार्यक्रम हो रहा था। इस पर सीडीओ ने प्रभारी प्रधानाध्यापक शिव कुमार शर्मा को निलंबित करने के लिए बीएसए को निर्देशित किया । जिला पंचायत राज अधिकारी को प्रधान के विरूद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए।



     स्कूल में 58 विद्यार्थी मिले, बृहस्पतिवार को 116 छात्र आए थे। रसोईया सरोज देवी ने बताया कि रोजाना लगभग 60 बच्चों का भोजन बनता है। इस पर सीडीओ ने कहा कि प्रतीत होता है कि मध्यान्ह भोजन में फर्जी उपस्थिति दर्ज की जा रही है। विद्यालय को प्राप्त कंपोजिस्ट ग्रांट में वित्तीय अनियमितता मिली। विद्यालय परिसर में पांच पेड़ काटे गये हैं। NPELG कक्ष में निर्मित पुस्तकालय भी संचालित नहीं मिला।


     ऐसा अक्सर देखने को मिलता है कि गांव वालों तथा ग्राम प्रधान के दबाव में आकर प्रधानाध्यापक विद्यालय में कार्यक्रम की अनुमति दे देते हैं और अगर किसी अधिकारी की जांच हो जाती है को कार्यवाही का सामना भी करना पड़ता है।


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क्या हुआ शिक्षकों के पहचान पत्र (I-card) के पैसे का?

       

          कोरोना काल के दौरान विभाग द्वारा सभी शिक्षकों के लिए पहचान पत्र (I-card) बनाने के लिए धन आवंटित किया गया था। प्रति शिक्षक ₹50 के दर से धन आवंटित किया गया था। उस दौरान अधिकतर काम ऑनलाइन हो रहे थे तो शिक्षकों से ऑनलाइन फोटो और डाटा मांगा गया था और अधिकतर शिक्षकों ने दिया भी था। परंतु मात्र कुछ ही शिक्षकों का पहचान पत्र बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी किया गया। बाकी के शिक्षकों का पहचान पत्र आजतक न तो बन पाया और न ही उसके लिए आवंटित पैसों का कुछ अता पता है।



         इतने वर्ष गुजर जाने के बाद भी अधिकारियों ने एक बार भी सुध नहीं ली। ऐसे में जब कहीं अन्य जगह बेसिक के शिक्षकों को ड्यूटी लगती है तो हर बार उनको खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से टेंपरेरी पहचान पत्र बनवाना पड़ता है। और कई बार अपने शिक्षक होने का प्रमाण देने के लिए ज्वाइनिंग लेटर दिखाना पड़ता है, जिससे शिक्षकों को काफी परेशानी होती है।


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मेहनती शिक्षक: एक अनूठी कहानी

      शिक्षकों का कार्यक्षेत्र एक ऐसा क्षेत्र है जो मेहनत, समर्पण, और उत्साह का खेत है। इसमें से एक शिक्षक है जो अपने उदाहरणीय मेहनत और संघर्ष के लिए जाने जाते हैं, और उनका यह कार्यक्षेत्र उन्हें एक अद्वितीय व्यक्ति बनाता है।


     श्रीमान राजेश शर्मा, जो एक उच्चतम स्तर के विद्यालय में गणित के शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं, वे अपनी अनूठी मेहनत और शिक्षा के प्रति अपने अदम्य समर्पण के लिए पहचाने जाते हैं।


     राजेश शर्मा का सफर शुरू हुआ एक साधारित गाँव से, जहां उनके परिवार ने गरीबी के बावजूद उन्हें शिक्षा के महत्व को समझाया। राजेश ने अपनी पढ़ाई को सराहनीय स्तर पर पूरा किया और गणित में अपनी रुचि को बढ़ाते हुए उन्होंने अपने लक्ष्य का पीछा किया।


     इसके बाद, उन्होंने अध्यापन में अपनी कदम रखी और एक उच्चतम स्तर के विद्यालय में गणित के शिक्षक के रूप में अपनी करियर की शुरुआत की। राजेश शर्मा की मेहनत और उनके विद्यार्थियों के प्रति उनका समर्पण ने उन्हें एक अनूठे शिक्षक के रूप में उच्च मानक हासिल करने में सफल बना दिया।


     राजेश शर्मा की शिक्षा के प्रति उनका विशेष दृष्टिकोण है। वे सिर्फ पाठ पढ़ाने वाले नहीं हैं, बल्कि वे अपने छात्रों को गणित की दुनिया में रुचि बढ़ाने के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी पाठशाला उन्हें सिर्फ गणित के सिद्धांतों को सिखाने का स्थान नहीं है, बल्कि यह एक स्थान है जहां राजेश छात्रों को अच्छे नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित करते हैं।


     राजेश शर्मा का एक और विशेषता यह है कि वे अपने छात्रों के साथ संवाद बनाए रखते हैं। उनकी पाठशाला में छात्रों का सकारात्मक योगदान है और उन्हें सुनने और समझने का मौका मिलता है। इससे राजेश न केवल गणित के विषय में उनके छात्रों के साथ संबंध बना सकते हैं, बल्कि उन्हें उनके जीवन के सभी पहलुओं में मार्गदर्शन करने में भी सहारा मिलता है। राजेश शर्मा का यह संवादप्रिय दृष्टिकोण उनके छात्रों को अपनी बातें साझा करने और समस्याओं का समाधान ढूंढ़ने के लिए प्रेरित करता है, जिससे उनका शिक्षा में सकारात्मक परिणाम होता है।


     एक दिन, राजेश शर्मा ने अपने छात्रों को गणित के अलावा भी जीवन के महत्वपूर्ण सिख सिखाने का निर्णय लिया। उन्होंने एक उदाहरण दिया और कहा, "गणित केवल कक्षा में ही नहीं, बल्कि हमारे जीवन में भी एक तरह का सिद्धांत है। समस्याएं हमारे सामने आती हैं, लेकिन हमें उन्हें हल करने का तरीका सीखना है।"



     इस प्रेरक कथन ने छात्रों की सोच में बदलाव लाया। उन्होंने गणित के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकालने की कला सिखाई और इसे उनके जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।


      राजेश शर्मा का यह महत्वपूर्ण सिद्धांत छात्रों को जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है। उनका उदार मानवीय दृष्टिकोण और मेहनत करने की भावना उनके छात्रों को अद्वितीय बनाता है।


      राजेश शर्मा का यह अनूठा तात्कालिक शिक्षक बनने का अहसास उनके छात्रों को भी स्वीकार्य हो गया है। उनके विद्यार्थी उन्हें गुरु और मार्गदर्शक के रूप में नहीं, बल्कि एक सहयोगी और मित्र के रूप में भी देखते हैं।


       इस अनूठे शिक्षक की मेहनत ने उन्हें उच्चतम स्तर की शिक्षा प्रदान करने में सफलता दिलाई है। राजेश शर्मा ने अपने छात्रों को बस गणित के सिद्धांतों से ही नहीं, बल्कि जीवन के अद्वितीय पहलुओं से भी रूबरू कराया है।


       उनकी मेहनत और समर्पण ने उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट शिक्षक बना दिया है, जिससे उन्हें समाज में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त होता है। राजेश शर्मा की अनूठी शिक्षा की प्रणाली ने उनके छात्रों को न केवल गणित में अच्छे परिणाम प्रदान किए हैं, बल्कि उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में सफल बनने के लिए भी तैयार किया है।

       राजेश शर्मा की यह अनूठी शिक्षा का सफलता सूत्र है, जो उनके छात्रों को सिर्फ विद्या का ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन के मूल्यों और सीखों को समझने का भी मौका देती है।


       राजेश शर्मा का यह महत्वपूर्ण संदेश है कि शिक्षक का कार्यक्षेत्र सिर्फ पाठ पढ़ाने का ही नहीं, बल्कि छात्रों को जीवन के साथ में जोड़ने और सुझाव देने का भी है। उनकी मेहनत और उनका समर्पण छात्रों को न केवल अच्छे छात्र बनने के लिए प्रेरित करता है, बल्कि उन्हें सफल और नैतिक नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित करता है।


       इसके अलावा, राजेश शर्मा ने अपनी पाठशाला को एक सहयोगी और साथी की भूमिका में स्थापित किया है। वह छात्रों के साथ खुले मन से बातचीत करते हैं और उन्हें अपनी दुनिया को समझने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे उनके छात्रों को एक मित्रप्रेमी और विश्वासी शिक्षक का अहसास होता है, जिससे उनका शिक्षा में भरपूर रूप से भागीदारी होती है।


       राजेश शर्मा की यह मेहनत और समर्पण उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में एक नेतृत्व भूमिका में स्थापित करने में सफल बना देती है। उनकी पाठशाला एक ऐसी स्थान है जहां शिक्षा को अधिकारिकता के साथ मिश्रित किया जाता है और छात्रों को अपनी रचनात्मकता को स्वीकार करने के लिए प्रेरित किया जाता है।


      इस अनूठे शिक्षक के किस्से से हमें यह सिखने को मिलता है  कि शिक्षा का मकसद सिर्फ परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं होता, बल्कि छात्रों को जीवन के साथ में संबंधित बनाना होता है। शिक्षक अगर मेहनत, समर्पण, और उत्साह के साथ कार्य करता है, तो छात्र भी उसी मेहनत और उत्साह के साथ अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में सफल हो सकते हैं।

      राजेश शर्मा की मेहनत, समर्पण, और शिक्षा में उनकी अनूठी दृष्टिकोण से सजग छात्रों को तैयार करने में एक महत्वपूर्ण प्रमाण है। उनकी उदार शिक्षा ने छात्रों को सिर्फ कक्षा में ही नहीं, बल्कि उनके जीवन में भी सफल बनाने की कला सिखाई है। उनका यह मिशन निरंतर चला रहा है और उनके छात्र उन्हें गुरु और मार्गदर्शक के रूप में नहीं, बल्कि अपने जीवन के सच्चे साथी के रूप में भी मानते हैं।


        इस अनूठे शिक्षक की कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि शिक्षा का मतलब सिर्फ साक्षरता प्राप्त करना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो हमें जीवन के हर पहलुओं में समर्थ बनाती है। राजेश शर्मा ने यहाँ तक सिखाया है कि शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ अकादमिक सफलता प्राप्त करना नहीं होता, बल्कि यह छात्रों को समझदार, समर्पित, और सकारात्मक नागरिकों में बदलने की दिशा में भी काम करती है।


       शिक्षक की भूमिका समझाने के लिए हमें राजेश शर्मा के जैसे उदाहरणों की आवश्यकता है ताकि हम समाज में शिक्षा के प्रभाव को सही तरीके से समझ सकें। राजेश शर्मा ने अपने छात्रों को शिक्षा के माध्यम से न केवल ज्ञान प्रदान किया है, बल्कि उन्हें जीवन के मूल्यों, सिद्धांतों, और सीखों से भी अवगत कराया है।


       राजेश शर्मा की उपेक्षित शिक्षा की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि वे अपने छात्रों को सुनते हैं और उनके समस्याओं का समाधान ढूंढ़ने में सहायक होते हैं। इससे राजेश न केवल गणित के विषय में उनके छात्रों के साथ संबंध बना सकते हैं, बल्कि उन्हें उनके जीवन के सभी पहलुओं में मार्गदर्शन करने में भी सहारा मिलता है।


       राजेश शर्मा की अनूठी शिक्षा ने उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रशंसनीय और अनूठे शिक्षक के रूप में स्थापित किया है। उनका संघर्ष, मेहनत, और छात्रों के प्रति समर्पण ने उन्हें एक अद्वितीय स्थान प्रदान किया है, जिससे उनका प्रभाव समाज में दृढ़ है।


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शिक्षकों का निलंबन और बहाली हुआ टेढ़ी खीर, जानें क्या है नया नियम?

     बेसिक शिक्षा विभाग (U.P.Basic) में अब समुचित सबूतों और गंभीर आरोपों के आधार पर ही शिक्षकों व कर्मचारियों का निलंबन हो सकेगा। बिना दंड के बहाली भी नहीं हो सकेगी। एवं निलंबन और बहाली प्रक्रिया पर काफी हद तक बीएसए BSA की मनमानी नहीं चलेगी। इसके लिए महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने BSA को निर्देश दिए है कि निलंबन प्रकरणों की समीक्षा कर कार्रवाई सुनिश्चित करें।



     महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने 6 फरवरी को सभी BSA को पत्र भेजकर निर्देशित किया है कि यदि शिक्षक व कर्मचारी पर गंभीर आरोप हों और समुचित आधार हो तभी निलंबित किया जाए। BSA की ओर से की गई अनुशासनिक कार्रवाई के विश्वेषण में संज्ञान में आया है कि निलंबन के बाद बिना किसी दंड ( दीर्घ एवं लघु दंड) अधिरोपित किए बिना बहाल कर दिया जाता है। इससे यह प्रतीत होता है कि बिना आधार के निलंबन किया जा रहा है। निलंबन उपरांत शासनादेश, निर्देश का पालन नहीं किया जा रहा है। जिससे बहाल कर दिया जाता है। यह स्थिति कदापि उचित नहीं है। निलंबन प्रकरणों की समीक्षा कर कार्रवाई करना सुनिश्चित करें।

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Meaning of Niyuthsa

 Meaning of Niyuthsa is Warrior

 Meaning of Niyutsa= warrior 

नियुत्सा का अर्थ है योद्धा

नियुत्सा = योद्धा

शिक्षकों पर हुआ हमला, मचा बवाल

    रायबरेली। अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने लखनऊ गए शिक्षकों की बस पर ऊंचाहार में कुछ लोगो ने पथराव कर दिया। अचानक पथराव होने से बस में अफरा तफरी मच गई। इसमें कई शिक्षकों को चोट आई। कोतवाली पहुंचे शिक्षकों ने मामले की शिकायत कीl

    यह मामला रविवार देर शाम का है। लखनऊ में शिक्षकों का प्रदर्शन था। इसमें कौशांबी जनपद से बड़ी संख्या में शिक्षक बस से प्रदेश मुख्यालय पर प्रदर्शन करने गए थे। जहां से वापस लौट रहे शिक्षकों की बस शहर मुख्यालय के पास रूकी थी, वहां पर रोडवेज बस में सवार कुछ लोगों से उनका झड़प हो गया। उसके बाद निजी बस पर सवार शिक्षक अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए।



    इस बीच रोडवेज बस पर सवार लोग ऊंचाहार कोतवाली क्षेत्र के सवैया तिराहा के पास पहुंचे और उन्होंने शिक्षकों की बस को रोक लिया और उस पर ताबड़तोड़ पथराव शुरू कर दिया। कुछ शिक्षकों के साथ मारपीट भी की गई। अचानक हुए हमले से परेशान शिक्षक सकते में आ गए। इस हमले में करीब सात शिक्षक घायल हो गए। इसके बाद किसी तरह जान बचाकर शिक्षक कोतवाली पहुंचे।

    मौके पर पहुंची कोतवाली पुलिस कुछ युवकों को पकड़कर कोतवाली ले आई। उसके बाद कोतवाली पुलिस ने दोनों पक्षों में समझौता करा दिया। सुलह समझौता के बाद शिक्षक कौशांबी के लिए रवाना हो गए। कोतवाल आदर्श सिंह ने बताया कि दोनों पक्षों में मामूली विवाद हुआ था, जिसके बाद दोनों ने आपस में सुलह-समझौता कर लिया है। इसलिए इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।


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क्या अब नहीं काम करेगा पेटीएम, क्या होगा खाते में पड़े पैसों का?

 नई दिल्ली। पेटीएम की बैंकिंग सेवाओं पर आरबीआई के प्रतिबंध के बाद पेटीएम पेमेंट्स बैंक बड़ी मुश्किलों में फंस सकता है एजेंसियां इसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रंग की जांच कर सकती हैं। सूत्रों का दावा है कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक के पास ऐसे लाखों खाते थे, जिनमें KYC (अपने ग्राहक को जानो) नहीं की गई थी। एक हजार से अधिक उपयोगकर्ताओं के खाते एक ही पैन कार्ड पर चल रहे थे।

सूत्रों का कहना है कि इन खातों के जरिये पेटीएम पेमेंटस बैंक में सैकड़ों करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है। RBI ने इसी आधार पर शिकंजा कसा है। राजस्व सचिव संजय मल्होत्रा का कहना है, पेटीएम पेमेंट्स बैंक में मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका है। यदि फंड की हेराफेरी का कोई नया आरोप सामने आया, तो कंपनी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय जांच करेगा ।

RBI ने Paytm पर 20 जून, 2018 से कोई भी नया खाता और वॉलेट खोलने पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, दिसंबर, 2018 में प्रतिबंध हटा लिया गया था। इसके बाद भी कंपनी में अनियमितता ओं की जानकारी आती रही। RBI और ऑडिटर्स दोनों की जांच में पाया गया कि नियमों का पालन नहीं हो रहा है। गौरतलब है कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक के पास करीब 35 करोड़ ई-वॉलेट हैं। इनमें से करीब 31 करोड़ निष्क्रिय हैं। लाखों खातो में KYC अपडेट नहीं है।



पेटीएम चलेगा, पर बैंक नहीं–

आरबीआई के सारे प्रतिबंध पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर हैं। इसलिए, पेटीएम (Paytm QR, बीमा, कर्ज वितरण, साउंडबॉक्स और कार्ड मशीन आदि) पर इसका असर नहीं होगा। पेमेंट्स बैंक से जो भी कारोबार जुड़े हैं, वही प्रभावित होंगे।

दूसरे भुगतान एप काइस्तेमाल करें कारोबारी–

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन खंडेलवाल ने कहा, वित्तीय दिक्कतों से बचने के लिए व्यापारी लेनदेन के लिए पेटीएम के जगह अन्य भुगतान प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें तो बेहतर होगा।

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वायरल खबर के संबंध में विवेकानंद आर्य का आया स्पष्टीकरण

      वायरल हो रहे के खबर के संबंध में TSCT के अध्यक्ष विवेकानंद आर्य का स्पष्टीकरण आ गया है। जिसमें उन्होंने बताया कि यह आरोप एकदम ही निराधार है और राजनैतिक खेला करने के लिए लगाया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि श्रद्धांजलि समारोह जिला टीम अपने स्तर से करती है और इस हेतु किसी से कोई पैसे नहीं मांगे गए। बल्कि कुछ परिवारों ने इस हेतु स्वयं आगे आ कर सहयोग किया था, परंतु उनकी भी धनराशि लौटा दी गई है क्योंकि इसका खर्च जिला स्तर की टीम खुद ही उठाना चाहती थी। महिला द्वारा लगाया गया आरोप पूर्ण रूप से गलत है।




       इस संबंध में अन्य दिवंगत शिक्षकों के स्वजनों का वीडियो भी डाला गया है जिसमे उन्होंने पैसे मांगे जाने के आरोप को गलत बताया है। और साथ ही एक दिवंगत शिक्षक की पत्नी का मैसेज भी डाला गया है जिसमे उन्होंने आरोप को गलत बताया है। ऐसे में सही कौन और गलत कौन इसको लेकर शिक्षकों में उहापोह की स्थिति बनी हुई है।


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TSCT पर लगा धन उगाही का आरोप, जाने क्या है पूरा मामला।

      बरेली। दिवंगत शिक्षकों के स्वजन को सम्मानित करने और उनकी मदद करने के नाम पर कार्यक्रम किया गया, जिसके लिए दिवंगत शिक्षकों के स्वजन से भी कसूल कर ली गई। शिक्षकों को जानकारी होने पर मामला तूल पकड़ने लगा। बाद में दिवंगत शिक्षकों के  स्वजनों को धनराशि लौटा दी गई। हालांकि श्रद्धांजलि सभा करने वाले शिक्षकों ने कहा कि उन लोगों ने संगठन से दिवंगत शिक्षकों के स्वजनों को 55-55 लाख रुपए की सहयोग राशि भी दिलाई है।

     स्मार्ट सिटी के ऑडिटोरियम में टीचर्स सेल्फ केयर टीम बरेली की 28 जनवरी को शिक्षक संगोष्ठी एवं श्रद्धांजलि सभा हुई थी । जिसमें दिवंगत शिक्षक रतन गंगवार, सत्यप्रकाश गंगवार, प्रभात, सुरेश पाल, हरीश गंगवार को जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों तथा शिक्षकों ने श्रद्धांजलि अर्पित की थी। जिसकी बाद दिवंगत चार शिक्षकों के स्वजनों को 55-55 लाख की धनराशि दिलाई गई। लेकिन इस हेतु दिवंगत शिक्षकों के स्वजनों से 50-50 हजार रुपए की वसूली की गई।



     जिससे नाराज दिवंगत शिक्षक की पत्नी ने व्हाट्सएप ग्रुप पर अपनी नाराजगी जताई तथा इससे संबंधित ऑडियो भी वायरल किए। यह भी बताया गया कि दी गई राशि को बीमा व एफडी कराने पर भी जोर डाला जा रहा। संगठन पर आरोप लगाने पर टीएससीटी की राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेकानंद आर्य ने बरेली कार्यकारणी को धनराशि लौटने के निर्देश दिए।


     इस मामले को अन्य शिक्षक संगठनों ने गलत बताया। वहीं अन्य शिक्षकों में रोष की स्थिति बनी हुई है। सभी लोग इस बात से परेशान है कि अगर इस तरह से धन उगाही की जा रही है तो एक तो यह गलत है ऊपर से उसका विरोध करने पर धन वापस लेने की भी धमकी भी दी जा रही, जो नाकाबिल ए बर्दाश्त है। लोगों का कहना है कि विवेकानंद आर्य को इस मामले की जांच कर दोषियों को निष्कासित करने की जगह सहयोग राशि वापस लेने वाली बात उनके ऊपर भी प्रश्न खड़ा करती है। ऐसे में TSCT से लोगों का भरोसा खत्म हो सकता है और लोग नहीं चाहते कि शिक्षक हित वाली इस संस्था से लोगों का भरोसा उठे।


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शिक्षकों को किससे मिला एक बार फिर झूठा आश्वासन?

    लंबे समय से नियुक्ति के लिए आंदोलन कर रहे 69000 शिक्षक भर्ती के शेष अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल की बृहस्पतिवार को बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह से मुलाकात हुई। वार्ता में अभ्यर्थियों के मामले के जल्द निस्तारण की उम्मीद बढ़ गई है। मंत्री ने अधिकारियों को उनकी समस्या के समाधान का प्रस्ताव तैयार करने और जल्द मुख्यमंत्री से मुलाकात का आश्वासन दिया। भर्ती में 6800 चयन सूची के अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे विजय यादव से मंत्री, बेसिक शिक्षा के प्रमुख सचिव डॉ. MKS सुंदरम समेत कई अधिकारियों के साथ वार्ता हुई। विजय यादव ने बताया कि विभागीय मंत्री ने आश्वस्त किया है कि जल्द इस मामले में निर्णय लेकर रास्ता निकाला जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में अभ्यर्थी ममता प्रजापति, अमरेंद्र सिंह पटेल, कृष्णा चंद्र व विक्रम भी शामिल रहे।











शिक्षकों से सबंधित हाईकोर्ट का क्या है नया आदेश?

      लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम आदेश में कहा कि टीईटी पास किए बिना प्राथमिक शिक्षकों का प्रमोशन न हो। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की 11 सितंबर 2023 की अधिसूचना के तहत निर्णय लेने के बाद ही प्राथमिक शिक्षकों की प्रोन्नति की जाए। इस अधिसूचना के तहत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक बेसिक स्कूलों के सहायक व प्रधान अध्यापक/अध्यापिका के पदों पर प्रमोशन के लिए TET को अनिवार्य किया गया है। हालांकि, कोर्ट ने स्पप्ट किया है कि यह आदेश अर्ह (TET पास) अध्यापकों की प्रोन्नति में बाधा न माना जाए। इस संबंध में की गई कार्यवाही इस याचिका के परिणाम के अधीन होगी।



     यह आदेश न्यायमूर्ति एआर मसूदी और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने हिमांशु राणा व अन्य की याचिका पर दिया। याचिका में उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा ( अध्यापक) सेवा नियमावली 1981 के नियम 18 की वैधता को उस सीमा तक चुनौती दी गई है जहां तक NCTE की अधिसूचना के तहत उसमें टीईटी को अनिवार्य करने का संशोधन नहीं किया गया है। याचियों का कहना था कि प्रोन्नति के लिए प्राथमिक शिक्षकों को TET पास होना जरूरी है। इसके बावजूद नियम 18 के तहत TET पास न करने वाले शिक्षकों को प्रोन्नत किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा यह मामला गौर करने योग्य है। कोर्ट ने मामले में केंद्र ,राज्य सरकार समेत सभी पक्षकारों को तीन हफ्ते में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।

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BSA सीतापुर ने उतारा सरकार का कर्ज

  अपने कृत्यों और बेल्ट कांड को लेकर चर्चा में आए सीतापुर BSA अखिलेश प्रताप सिंह एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।    सभी को पता है कि तमाम सबू...